हमारे बैंक के प्रथम अध्यक्ष श्री मोतीराम सहारण को श्रद्धांजलि
चौधरी मोतीराम जी द्वारा 1958 में जब इस बैंक का अध्यक्ष पद संभाला था तब यह बैंक वटवृक्ष रूपी पौधा शिशु अवस्था में था जबकि आज यह बैंक रूपी विशाल वटवृक्ष बन कर अपनी तरूणावस्था में है जिसकी घनी छाया में श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिलों के लाखों किसान एवं व्यापारी वर्ग लाभान्वित हो रहे हैं।

वर्तमान में इस विशाल वटवृक्ष रूपी बैंक की 22 शाखाओं रूपी टहनियां दोनों जिलों में फैली हुई हैं एवं प्रत्येक वर्ग चाहे वह किसान हो अथवा व्यापारी या मध्यम वर्ग हो या कर्मचारी अथवा लघु उद्योगपति की सेवा में समर्पित है एवं भविष्य में बढ़ते रहने की संभावनाएं हैं।

चौ. मोतीराम जी सहारण 1958 से 1972 तक लगातार अध्यक्ष पद पर रहे थे। वे एक कुशल प्रशासक ईमानदार व कर्त्तव्यनिष्ठ अध्यक्ष थे। उनके समय 1972 तक यह बैंक अपनी तरूणावस्था में आ चुका था एवं उनकी देखरेख में चहुंमुखी प्रगति की सीढ़ियों पर अग्रसर होता रहा है। परिणामस्वरूप आज यह बैंक जिन बुलन्दियों पर अग्रसर होकर न केवल राजस्थान उत्तरी भारत का अग्रणी सहकारी बैंक है। इसका अधिकांश श्रेय चौ. मोती राम सहारण के कुशल प्रशासन, निष्ठा, ईमानदारी का प्रतिफल है। हमारे बैंक के अध्यक्ष ईमानदार कर्त्तव्यनिष्ठ, सच्ची भावना से ओतप्रोत थे। जिसके प्रतिफल के रूप् में आपके सामने राजस्थान का अग्रणी बैंक विशाल वटवृक्ष के रूप में स्थित है। जिसके फल कर्मचारी एवं अन्य लोगों को प्राप्त हो रहे हैं।

ऐसे ईमानदान, कुशल प्रशासक योद्धा को शत-शत प्रणाम।