ऋण योजनाएं
दी गंगानगर केन्द्रीय सहकारी बैंक द्वारा कृषकों, व्यवयसायियों, कर्मचारियों एवं अन्य समस्त प्रकार के औद्योगिक एवं व्यापारियों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराता है। बैंक द्वारा 22 शाखाओं के माध्यम से श्रीगंगानगर जिले के आवेदकों को दो योजनाओं के अन्तर्गत ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

(क) फार्म सैक्टर
(ख) नाॅन फार्म सैक्टर

(क) फार्म सैक्टर

फार्म सैक्टर (कृषि निवेश ऋण) के अन्तर्गत अल्पकालीन ऋण, मध्यकालीन ऋण एवं दीर्घकालीन ऋण दिये जाते है जिनमें पात्रता एवं लिए जाने वाले पत्रादि का विवरण निम्नानुसार है:

अल्पकालीन ऋण:-


  • ऋण की पात्रता: कृषक के पास कम से कम 4 एकड़ दो फसली सिंचित कृषि भूमि हो।

    ऋण की योजना: अल्पकालीन ऋण के अलावा बड़े काश्तकारों को बैंक से जोड़ना एवं योग के अनुसार ऋण उपलब्ध कराना।

    अधिकतम ऋण सीमा: ऋणों के मापदण्ड वही होंगे जो मापदण्ड अल्पकालीन ऋणों पर प्रचलित है। बैंक के नहर से सिंचित कमाण्ड एरिया में अधिकतम ऋण अल्पकालीन रू. 4.00 लाख रू. प्रति कृषक स्वीकृत की जा सकेगी।

    समय अवधि: एक वर्ष (जुलाई से जून तक)

    ऋण की सुरक्षा: कृषि भूमि ऋण की दोगुणा कीमत की रहन दो जमानतदार जिनकी हैसियत ऋण से दोगुणा हो।


  • ऋण की पात्रता:
    1. समूह कम से कम 6 माह से सुचारू रूप से चालू हो।

    2. समूह के सभी सदस्य आर्थिक व सामाजिक रूप से समान श्रेणी से हो।

    3. समूह को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए समूह के नियम-कायदे हो।

    4. सभी सदस्यों को समूह के उद्देश्य व कार्यों की जानकारी हो।

    5. समूह द्वारा तय समय पर समूह की बैठकों का नियमित आयोजन हो।

    6. सभी सदस्यों की समूह बैठक में नियमित उपस्थित हो।

    7. सभी सदस्यों द्वारा समूह द्वारा तय राशि की नियमित बचत हो।

    8. समूह में एकत्रित बचत राशि का उपयोग सदस्यों को ऋण (आंतरिक ऋण) के रूप में हो।

    9. समूह का बैंक में/मिनी बैंक में खाता हो।

    10. सदस्यों द्वारा किये गये प्रत्येक लेनदेन बैठक व र्निगमों का विवरण नियमित किताबों (लेखा बही, रोकड़ बही, सदस्य पास बुक, बैठक रजिस्टर आदि)

    11. सदस्यों द्वारा समूह को तथा समूह द्वारा बैंक को ऋण की चुकती समय पर हो।

    12. कम से कम 10 अधिकतम 20 महिलाओं या पुरूषों समूह हो।

    ऋण की प्रयोजन: ग्रामीण/शहरी महिलाओं में बचत की भावना पैदा करना। बिना सिक्यूरिटी वाले लोगों को भी ऋण उपलब्ध कराना। महिलाओं को घरेलू कार्य के साथ कार्यकर आत्मनिर्भर बनाना।

    अधिकतम ऋण: प्रथम बार 6 माह में बचत का चार गुणा अथवा 50000/- रूपये जो भी कम हो। इसके पश्चात् वसूली नियमित होने पर बचत राशि का पांच गुणा से 10 गुणा तक।

    समय अवधि: 3 वर्ष

    ऋण की सुरक्षा: समूह का करार पत्र, समूह की बचत की राशि।


  • पात्रता: किसान वहां का निवासी हो। किसान के पास वेयर हाऊस में जमा अनाज भण्डारण की रसीद हो।

    ऋण की प्रयोजन: किसान की उपज का सही भाव दिलवाना। सस्ती दरों पर माल बिक्री पर रोक। बिना उपज बेचे किसान को धन उपलब्धता।

    अधिकतम ऋण: कृषक की उपज की कीमत का 55 प्रतिशत अधिकतम 2.00 लाख रूपये तक अग्रिम

    समय अवधि: 6 माह

    ऋण की सुरक्षा: वेयर हाऊस रसीद बैंक के पक्ष में प्लेज होकर ऋण अग्रिम तक किसान की उपज जो भण्डारित है बैंक के पक्ष में बन्धक रहेगी।


  • पात्रता: आवेदक के पास भेड़ होनी आवश्यक है। शाखा क्षेत्र का मूल निवासी हो। समिति का सदस्य हो।

    ऋण की प्रयोजन: भेड़ों को अचाक आई बिमारी से बचाने हेतु दवाई उपलब्ध कराना। चारा उपलब्ध कराना।

    अधिकतम ऋण: प्रति पशु (भेड़) हेतु 150 रूपये अधिकतम 12,500.00 रूपये

    समय अवधि: 1 वर्ष

    ऋण की सुरक्षा: समिति के माध्यम से ऋण दो जमानतदारों की जमानत


मध्यकालीन ऋण:-


  • पात्रता: कम से कम 1 हैक्टेयर कृषि भू धारकता केंचुआ पालन प्रशिक्षण का सर्टीफिकेट हो। जहां प्रोजेक्ट लगाना है वहां पानी की उचित व्यवस्था हो। तैयार खाद बिक्री की पूर्ण संभावनाएं हो।

    ऋण की प्रयोजन: कृषक को कृषि कार्य के अलावा कृषि सम्बन्ध कार्य से आय कच्ची गोबर की खाद की जगह अच्छी खाद उपलब्ध कराना।

    अधिकतम ऋण: 25 एम्टी के लिए 66000.00 रूपये तथा 50 एमटी के लिए 108000.00 रूपये

    समय अवधि: 5 वर्ष

    ऋण की सुरक्षा: कृषि भूमि रहन स्वीकृत ऋण की दोगुणा कीमत की। जहां शेड बनाया है वह जगह भी बैंक के दृष्टिबंधक रहेगी।


  • पात्रता: कृषि भू धारकता आवेदक के पास चारा, उपजाने के लिए भूमि हो। शेड स्वयं का तैयार हो। पशु चिकित्सालय नजदीक हो। दूध बिक्री की संभावना अच्छी हो। अग्रिम दो बार से 6 माह के गेप में होगा। अधिकतम ऋण सीमा: 2 से 10 दुधारू पशु गाय/भैंस। नहरी कृषि भूमि प्रति बीघा 20000.00 या डीएलसी दर का 50 प्रतिशत जो भी कम हो। समय अवधि: 5 वर्ष ऋण की सुरक्षा: कृषि भूमि स्वीकृत ऋण की दो गुणा राशि की बैंक पक्ष में रहन रहेगी। पशु दृष्टिबन्धक रहेंगे। एक जमानतदार लिया जाएगा।


  • पात्रता: आवेदक कृषि स्नातक हो। तीन माह का प्रशिक्षण लिया हो। क्लिनिक जहां खोलना हो वह स्थल स्वयं का हों। अधिकतम ऋण सीमा: 5.00 लाख रूपये तक समय अवधि: 5 वर्ष ऋण की सुरक्षा: क्लिनिक बिजनेस से आय दो जमानतदार जिनकी हैसियत ऋण से दो गुणा हो। कृषि भूमि रहन।


  • पात्रता: आवेदक कृषि भू धारक हो। ट्रैक्टर स्वयं का हो। आर.सी. स्वयं के नाम से हो। उपकरणों की आवश्यकता हो। केवल नये उपकरण दिये जाएंगें। अधिकतम ऋण सीमा: कोटेशन का 85 प्रतिशत ऋण व ऋणी का अंशदान 15 प्रतिशत होगा। समय अवधि: 5 वर्ष ऋण की सुरक्षा: आवेदक की कृषि भूमि रहन की जाएगी। ऋण राशि की दो गुणा कीमत की। एक जमानतदार उपकरण बैंक के दृष्टिबंधक के रूप में रहेंगे।


  • पात्रता: कृषक के पास 20 से 25 बीघा नहरी भूमि हो। लगातार 2 वर्ष से वसूली देता हो। समिति माध्यम से ऋण अग्रिम कृषि मित्र ऋणी हो। राशि गैर अवधिपार हो। बैंक से सीधा ऋण अग्रिम हो सकेगा। आवेदक व्यवसायी हो। 3 वर्ष की आयकर रिटर्न भरी हों, पात्रता रखता है। ऋण का प्रयोजन: कृषक की उत्पादित फसल को उचित भावन पर बेचना। समय की बचत करना। अधिकतम ऋण सीमा: 30000.00 रूपये या कोटेशन का 75 प्रतिशत जो भी कम हो। समय अवधि: कृषकों के लिए 5 वर्ष अन्य के लिए 3 वर्ष ऋण की सुरक्षा: वाहन की आर.सी. में बैंक का नाम दर्ज (दृष्टिबंधक)। कृषक मित्र के भूमि रहन व कर्मचारियों के लिए खाली चैक दो जमानतदार देने होंगे।


दीर्घकालीन ऋण योजनाएं (अवधि 5 वर्ष से अधिक):-


  • पात्रता: आवेदक कृषि भू धारक हो। नहरी भूमि कम से कम 10 बीघा। बारानी भूमि 25 बीघा। पानी सिंचाई योग्य हो। ऋण का प्रयोजन: नहरों की बारी नहीं आने पर फसल को पानी देकर बचाना। अधिक बिजान कर अधिक उपज प्राप्त करना। अधिकतम ऋण सीमा: कोटेशन एस्टीमेट का 85 प्रतिशत जो भी कम हो। समय अवधि: 9 से 11 वर्ष ऋण की सुरक्षा: आवेदक की कृषि भूमि रहन होगी। ट्यूबवैल बैंक के दृष्टिबन्धक रहेगा।


  • पात्रता: आवेदक कृषि भू धारक हो। पोण्ड जहां बनाना है, पानी पहुंचने की उचित व्यवस्था हो। पानी सिंचाई योग्य हो। पानी का साधन (नहर, ट्यूबवैल) ऋण का प्रयोजन: बिना आवश्यकता के पानी को इक्ट्ठा कर जरूरत के समय काम में लेना। अधिकतम ऋण सीमा: एस्टीमेट का 85 प्रतिशत समय अवधि: 5 से 9 वर्ष ऋण की सुरक्षा: कृषि भूमि रहन होगी। पोण्ड दृष्टिबन्धक होगा।


  • पात्रता: आवेदक भू धारक हो। पानी की उचित व्यवस्था हो। पानी सिंचाई योग्य हो। ऋण का प्रयोजन: कम पानी से अधिक सिंचाई करना। अधिकतम ऋण सीमा: (एस्टीमेट कोटेशन) इकाई लागत का 85 प्रतिशत समय अवधि: 5 से 9 वर्ष ऋण की सुरक्षा: कृषि भूमि रहन होगी। इकाई के उपकरण दृष्टिबंधक रहेंगे।


  • पात्रता: आवेदक भू धारक हो। पानी की उचित व्यवस्था हो। पानी सिंचाई योग्य हो। ऋण का प्रयोजन: कम पानी से अधिक सिंचाई करना। अधिकतम ऋण सीमा: (एस्टीमेट कोटेशन) इकाई लागत का 85 प्रतिशत समय अवधि: 5 से 9 वर्ष ऋण की सुरक्षा: कृषि भूमि रहन होगी। इकाई के उपकरण दृष्टिबंधक रहेंगे।


  • पात्रता: भू धारकता 8 एकड़ नहरी कृषि भूमि हो। स्थाई निवासी हो। ट्रैक्टर चलाने का अनुभव रखता हो। ऋण का प्रयोजन: भूमि सुधार कर अधिक उत्पादन लेना। अधिकतम ऋण सीमा: 5.00 लाख रूपये या कोटेशन 85 प्रतिशत, जो भी कम हो। नगद के रूप में भी भुगतान की सुविधा है। समय अवधि: 9 वर्ष ऋण की सुरक्षा: ट्रैक्टर बैंक के दृष्टिबंधक कृषि भूमि ऋण की दो गुणा कीमत की रहन बैंक पक्ष में। ट्रैक्टर क्रय हेतु नकद ऋण वितरण की योजना है।


(ख) नाॅन फार्म सैक्टर:

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य बैंक के कार्य क्षेत्र में निवास करने वाले सभी वर्गों के छात्र/छात्राओं को उच्च शिक्षा/व्यवसायिक/तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने या पूर्व से अध्ययनरत के अभिभावकों को वित्तीय सुविधा उपलब्ध करवाना है। इस योजनान्तर्गत उन सेवारत/प्रोफेशनल्स को भी वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी जो स्वयं उच्च शिक्षा और प्राप्त करना चाहते हैं तथा स्वयं की आये से ही ऋण चुकाना चाहते हैं।

    ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक जानकारियां:

    1. इस योजनान्तर्गत बैंक कार्य क्षेत्र के अन्तर्गत निवासी भारतीय नागरिकों को ही यह ऋण प्रदान किया जावेगा।

    2. छात्र/छात्रा की आयु 18 से 30 वर्ष के मध्य होनी चाहिए तथा अभिभावक की आयु 55 वर्ष होगी।

    3. केन्द्र एवं राज्य सरकार के अधिकारियों/कर्मचारियों को ऋण उपलब्ध करवाने की दशा में नियोक्ता से यह अन्डरटेकिंग देनी होगी की ट्रांसफर की दशा में किश्तों की राशि वेतन से काटकर बैंक को भेजी जाती रहेगी।

    4. ऋण के उद्देश्य में वर्णित तकनीकी/व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश या अध्ययनरत होने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर ही ऋण हेतु पात्र माना जावेगा अथवा जिन्होंने ऐसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु पात्र माना गया हो, या पूर्व से ऐसे पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हों, उन्हें भी इस प्रतिबन्ध के अधीन ऋण का पात्र माना जावेगा एवं इस सम्बन्ध में सम्बन्धित शिक्षण संस्थान का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा।

    5. ऋणी की आय इतनी पर्याप्त एवं निरन्तर किस्म वाली होनी चाहिए कि वे ऋण चुकाने में समर्थ हो सके।

    6. आय का प्रमाणन आयकर निर्धारण रिटनर्स, रियोक्ता से जारी आय प्रमाण-पत्र अथवा मासिक वेतन स्लिप जिसमें कटौतियों का भी पूर्ण विवरण हो या इसी तरह के अन्य किसी दस्तावेज से किया जा सकेगा।

    7. अधिकतम ऋण सीमा काॅस्ट आॅफ स्टेडीज की 90 प्रतिशत होगी। जिसकी अधिकतम सीमा भारत में शिक्षा प्राप्त करने पर 6.00 लाख तथा विदेश में शिक्षा प्राप्त करने पर 10.00 लाख रूपये तक होगी।

    8. इस प्रकार के ऋण के लिए मार्जिन मनी 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

    9. अभिभाविक द्वारा स्वयं के कोषों से पुस्तकों, उपकरणों, ड्रेस, होस्टल मैस चार्जेज के लिए राशि व्यय की गई है तो 2 माह के अन्दर-अन्दर बैंक से इस प्रकार के किये गये व्ययों के लिए पुनर्भरण प्राप्त कर सकता है।

    10. ऋण का भुगतान सीधे संस्था को किया जावेगा।

    11. उपकरण मद में राशि 10000.00 रूपये से अधिक होने पर ऋणी को कोटेशन प्रस्तुत करनी होगी तथा मार्जिन मनी जमा कराते हुए बैंकर्स चैक सीधे डीलर को जारी किया जावेगा।

    12. छात्राओं की शिक्षा हेतु ब्याज दर 0.50 प्रतिशत की छूट।

    13. ऋण अदायगी की अवधि पाठ्यक्रम की अवधि के अनुरूप निर्धारित की जावेगी। ऋण राशि का भुगतान अधिकतम 5 वर्षों के भीतर करना होगा।

    14. ऋणी द्वारा 2 व्यक्ति जो कि बैंक को मान्य हों, की गारन्टी निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करनी होगी।

    15. दो व्यक्तियों की गारन्टी के अतिरिक्त ऋणी को ऋण राशि के डेेढ़ गुणा के मूल्य वाली अचल सम्पत्ति यथा मकान, खेतीहार जमीन, दुकानों आदि के कागजात इक्कीटेबल बन्धक रखने होंगे।

    16. यदि आवेदक द्वारा अन्य संस्था से ऋण लिया हुआ है ओर वह इसे चुकाकर बैंक से पूर्ण लेना चाहते है।


  • आवेदक की पात्रता एवं ऋण चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए बैंक ऐसे आवेदक पर विचार कर सकता है। नियमत आय के स्त्रोत वाले व्यक्तियों को भवन निर्माण/क्रय करने हेतु प्रोत्साहित कर आवास समस्या के निराकरण में सहयोग करने, व्यवसायिक प्रयोजन हेतु वाणिज्यक परिसर जैसे दुकान, शो रूम, गोदाम क्रय/निर्माण को प्रोत्साहित कर आधारभूत सुविधाओं में अभिवृद्धि करने, विद्यमान वाणिज्यिक एवं आवासीय परिसर की मरम्मत/अभिवृद्धि एवं नवीनीकरण के लिए वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध करवाने और कृषि भूमि पर क्रय किये गये आवासीय भूखण्ड को सक्षम प्राधिकारी से नियमन कराने हेतु भूमि रूपान्तरण शुल्क, विकास शुल्क, पंजीकरण शुल्क आदि के भुगतान हेतु ऋण उपलब्ध करवाने के लिए इस योजना को लागू किया गया है।

    ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक जानकारियां:

    1. राजस्थान सरकार के स्थाई कर्मचारी अर्द्धशासकीय/स्वायत्तशासी संस्थाओं के कर्मचारी इस योजना में ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

    2. ऐसे व्यक्ति जो गत तीन वर्षों से नियमित रूप से आयकर रिटर्न भरते हैं एवं उनकी कर योग्य आय न्यूनतम 1.00 से अधिक है, पात्रता रखते हैं।

    3. ऋणी की अधिकतम आयु 50 वर्ष हो।

    4. योजनान्तर्गत न्यूनतम 25000.00 रूपये एवं अधिकतम 20.00 लाख रूपये का ऋण भवन क्रय व निर्माण हेतु प्राप्त कर सकता है एवं भवन मरम्मत परिवर्द्धन/परिवर्तन आदि हेतु अधिकतम 1.00 लाख रू. ऋण राशि प्रति व्यक्ति होगी।

    5. ऋण अदायगी की अवधि 15 वर्ष अथवा वेतनभोगी कर्मचारी के मामले में सेवानिवृत्ति की तिथि एवं अन्य व्यक्तियों के मामलों में 65 वर्ष की आयु में जो भी कम होगी, के आधार पर निर्धारित की जावेगी।

    6. ऋण से क्रय किया गया/निर्मित मकान जिस भूमि पर निर्मित है, उस भूमि सहित सम्पूर्ण बैंक के पक्ष में साम्य/पंजीकृत बंधक के रूप में रहेगी।

    7. ऋण का पुनर्भुगतान मासिक समान किश्तों में (मूल ऋण एवं ब्याज सहित) किया जावेगा।

    8. अन्य संस्था के लिए आवास ऋण के चुकाने के लिए ऋण उपलब्ध करना।


  • वेतनभोगी कर्मचारियों को सरलीकृत रूप से दैनिक उपभोग की समस्त वस्तुऐं तुरन्त मुहैया कराने हेतु साख सुविधा उपलब्ध करवाने हेतु योजना।

    राजकीय/अर्द्धशासकीय, पंचायत समिति, नगरपालिका, कृषि उपज मण्डी समिति, विद्युत वितरण निगम तथा उपक्रम पी.एच.ई.डी. में कार्यरत स्थाई कर्मी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। सहकारी संस्थायें यथा भूमि विकास बैंक, क्रय-विक्रय सहकारी समिति, उपभोक्ता भण्डार एवं ग्राम संवा सहकारी समिति के स्थाई कर्मचारी भी योजना में लाभान्वित हो सकंेगे।

    ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही:

    1. कर्मचारी के योजना में लाभान्वित होने के लिए अपने विभाग के आहरण एवं वितरण अधिकारी से पिछले माह का वेतन प्रमाण-पत्र तथा राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम 1965 की धारा 41 के अन्तर्गत विभागीय अण्डरटेकिंग प्रस्तुत करनी होगी।

    2. साख सुविधा की अधिकतम सीमा 2.00 लाख रूपये है।

    3. कर्मचारी द्वारा प्रस्तुत प्रमाण-पत्र में उल्लेखित कुल वेतन का 8 गुणा से 12 गुणा तक तथा या अधिकतम 2.00 लाख रूपये तक दोनों में से जो भी कम हो, सुविधा उपलब्ध करवाई जावेगी।

    4. साख सुविधा की अवधि तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी।

    5. साख सुविधा का उपयोग कर्मचारी अपनी इच्छानुसार कर सकेगा।

    6. अवैतनिक एवं संस्था से सीधे वसूली का कड़ीबंधन नहीं होने की दशा में कोलेक्ट्रल सिक्यूरिटी ली जावेगी।


  • सहकार स्वरोजगार योजना मुख्यतया रोजगारोन्मुखी प्रवृत्ति कुटी उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई है, जिसके अन्तर्गत नाबार्ड एवं जिला उद्योग केन्द्र के अन्तर्गत 22 वर्गों की सूची अनुसार, सेवा एवं व्यापारिक सेवाओं के अन्तर्गत कम्प्यूटर सैंटर, एस.टी.डी. बूथ, सोलर कुकर, सोलर हीटर आदि तथा कृषि के सहायक प्रयोजन के अन्तर्गत लघु डेयरी विकास, मुर्गी पालन, मछली पालन आदि हेतु साख सीमा स्वीकृत की जा सकेगी।

    ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही:

    1. योजना में पात्रता के लिए सहकारी क्षेत्र में किसी न किसी रूप में गत दो वर्षों से जुड़ाव आवश्यक है।

    2. बैंक की जिस शाखा से साख सुविधा लेना चाहता है व उसके कार्यक्षेत्र का निवासी होना चाहिए।

    3. इस योजनान्तर्गत लाभार्थी द्वारा परियोजना लागत का न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि अपने स्वयं के अंशदान के रूप में विनियोजन करनी होगी एवं शेष 75 प्रतिशत राशि तक का ऋण बैंक से उपलब्ध होगा, जिसकी अधिकतम सीमा रूपये 2.00 लाख रूपये प्रति व्यक्ति या स्वीकृत साख सीमा, जो भी कम हो होगी, न्यूनतम ऋण राशि 25000.00 रूपये।

    4. साख सीमा का निर्धारण 3 वर्ष की अवधि के लिये किया जावेगा।

    5. ऋण की अदायगी अवधि स्थगन अवधि सहित 5 वर्ष होगी।


  • निशक्तजनों को अति लघु उद्यम हेतु व्यवसायिक आवश्यकताओं के लिए अत्याधिक सरलीकृत प्रक्रिया से सुगम विनत उपलब्ध करवाने हेतु यह योजना प्रारम्भ की गई, जिसमें व्यवसाय में वृद्धि के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हो सकें एवं वह आत्मनिर्भर बन सके।

    ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही:

    1. आवेदक निःशक्त व्यक्ति अधिनियम, 1965 के प्रावधानों के अनुसार निःशक्त होना चाहिए।

    2. आवेदक राजस्थान राजय का मूल निवासी हो।

    3. आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष एवं अधिकतम 45 वर्ष हो।

    4. आवेदक के परिवार की समस्त स्त्रोतों से आय 2000.00 रूपये मासिक से अधिक न हो।

    5. आवेदक द्वारा पूर्व में कियोस्क योजना अथवा अन्य किसी योजना में स्वरोजगार व्यवसाय योजना के अन्तर्गत सब्सिडी आदि का लाभ नहीं लिया गया हो।

    6. आवेदक पर किसी भी बैंक, सरकारी अथवा अर्द्धसरकारी संस्था का अवधिपार ऋण बकाया नहीं हो।

    7. आवेदक का विकलांगता परिचय पत्र व पास बुक बनी हुई होनी चाहिए।

    8. उद्यमी प्रशिक्षित एवं व्यवसाय जो वह कर रहा है, उसे उस कार्य को करने का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए।

    9. 1.00 लाख तक अधिकतम लागत वाले स्वरोजगार/व्यवसाय हेतु 30 प्रतिशत अधिकतम 30000/- रूपये अनुदान व शेष 70000/- रूपये (70 प्रतिशत) के रूप में उपलब्ध होगा।

    10. निःशक्त व्यक्ति को उद्यम की कुल लागत की 30 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में समाज कल्याण विभाग द्वारा बैंक को उपलब्ध करवाई जावेगी।

    11. बैंक उद्यमी से 10 प्रतिशत मार्जिन मनी की प्राप्ति सुनिश्चित करते हुए कुल प्रोजेक्ट राशि का 90 प्रतिशत ऋण स्वीकृत कर सकेगा।


  • ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही

    1. गत तीन वर्षों के फर्म का वार्षिक आंकड़ा।

    2. रहन सम्पत्ति की वैल्यूएशन रिपोर्ट।

    3. भार-मुक्ति प्रमाण-पत्र/सर्च रिपोर्ट गत 12 वर्षों की।

    4. दो जमानतदार-ऋण राशि से दो गुणा हैसियत।

    5. चालू खाता।

    6. ऋण अवधि एक वर्ष, वार्षिक नवीनीकरण।

    7. अधिकतम ऋण राशि 10 लाख।

    8. अंतिम टैक्स भुगतान/निर्णय की प्रति।


  • ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही:

    1. ऋण अवधि 3 से 10 वर्ष।

    2. ऋण सीमा 2 लाख से 25 लाख तक।

    3. रहन सम्पत्ति की मूल्यांकन रिपोर्ट/सर्च रिपोर्ट गत 12 वर्षों की।

    4. प्रोजेक्ट रिपोर्ट, अप्रेजल रिपोर्ट।

    5. जिला उद्योग केन्द्र का पंजीयन प्रमाण-पत्र।

    6. कोटेशन का 75 प्रतिशत ऋण मशीनरी खरीद हेतु।

    7. त्रैमासिक किश्त वसूली/मासिक किश्त वसूली।


  • ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही:

    1. उद्योग धंधे जैसे - शोप फैक्ट्री, प्लास्टर आॅफ पेरिस, जिप्सम उद्योग, सिनेमा निर्माण, समस्त प्रकार के लघु उद्योग।

    2. प्रोजेक्ट रिपोर्ट, अप्रेजल रिपोर्ट।

    3. खनिज विभाग से स्वीकृत प्रमाण-पत्र/लीज डीड।

    4. सेल टैक्स की सुविधा में 15 वर्ष तक की छूट।

    5. जिला उद्योग केन्द्र से पंजीयन प्रमाण-पत्र।

    6. कोलेस्ट्रल सिक्योरिटी हेतु कृषि भूमि दी जा सकती है।

    7. त्रैमासिक किश्त वसूली।


  • ऋण प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही:

    1. वाहन चालने का लाईसेन्स।

    2. कोलेस्ट्रल सिक्योरिटी की वैल्यूएशन/सर्च रिपोर्ट।

    3. दो जमानतदार ऋण राशि से दो गुणा हैसियत।

    4. वाहन की कोटेशन का 75 प्रतिशत ऋण।

    5. मासिक किश्त वसूली।

    6. समय अवधि 4 वर्ष 6 माह - जीप, कार, ट्रक बस, टाटा 407 भार वाहक।


  • उद्देश्य: व्यक्तियों, व्यापारियों, फर्मों आदि कि आकस्मिक पारिवारिक, सामाजिक व व्यापारिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु।

    पात्रता: सरकारी/अर्द्धसरकारी/सवायतशासी संस्था अपना सार्वजनिक (सींचित दायित्व कम्पनियों में कार्यरत स्थाई वेतनयोगी कर्मचारी जिसके पास बैंक के कार्यक्षेत्र में रहन रखने हेतु भार रहित अचल सम्पत्ति वास्तविक कब्जे में उपलब्ध हो।

    ऋण राशि एवं ऋणी का अंशदान: न्यूनतम राशि रूपये 1.00 लाख एवं अधिकतम रूपये 20.00 लाख का ऋण दिया जा सकेगा। अचल सम्पत्ति का डी.एल.सी. मूल्यांकन का 50 प्रतिशत राशि तक ऋण अग्रिम किया जा सकेगा।

    ऋण की अवधि: 5 वर्ष अपग ऋणी की आयु 65 वर्ष की होने तक जो भी कम होगी।

    ब्याज: ब्याज मासिक आधार पर वसूल किया जायेगा।

    ऋण की सुरक्षा/प्रत्यापति: जिस अचल सम्पत्ति पर रहन रखकर ऋण लिया गया है, वह सम्पत्ति बैंक के पत्र में सामय/पंजीकृत बंधक के रूप में रहेगी जिस पर बैंक का प्रथम भार होगा।


  • लघु कृषकों/सीमान्त कृषकों/किरायेदार कृषकों/मौखिक पट्टेधार कृषकों के संयुक्त दायित्व समूहों को ऋण सुविधा नाबार्ड के दिशानिर्देशानुसार उपलब्ध करवाया जाता है।


  • उद्देश्य: फार्मेसी में डिप्लोमा/स्नातक उपाधि प्राप्त करने वाले अभ्यार्थियों द्वारा औषधी विक्रय हेतु दुकान खोले जाने जिसमें फर्नीचर, कम्प्यूटर, फ्रिज आदि की आवश्यकताओं के लिए पंूजीगत ऋण एवं औषधि के भण्डारण हेतु कार्यशील पूंजी साख सीमा स्वीकृत की जा सकेगी।

    पात्रता: योजनान्तर्गत मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय से फार्मेसी से डिप्लोमा डिग्री उपाधि हो। ऋणी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष एवं अधिकतम आयु 55 वर्ष हो। केवाईसी सावधी मानदेय की पालना अनिवार्य है। सजम अधिकारी का अनुज्ञा पत्र/लाइसेन्स प्रस्तुत करना होगा।

    ऋण सीमा: अधिकतम 5.00 लाख रूपये

    अवधि: पंूजीगत ऋण 5 वर्ष हेतु कार्यशील पूंजी ऋण 1 वर्ष हेतु नवीनीकरण की शर्तों पर


  • वास्तविक लागत के ऋण 85 प्रतिशत स्वयं का मार्जिन 15 प्रतिशत ग्राम सेवा सहकारी समितियों के सदस्यों के अक्षर सौर ऊर्जा उपकरण उपलब्ध करवाना। जिस पर अनुदान की सुविधा है।


  • उद्देश्य:

    1. किसानों को कृषि से सम्बद्ध प्रायोजनों हेतु साख सीमा के रूप में वित्त सुविधा उपलब्ध करवाना उसके कृषि कार्यों में निरन्तरता बनी रहे तथा उसे साहूकारों के चुंगुल में नहीं फंसना पड़े।

    2. बैंकों के पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का लाभकारी विनियोग हो सके।

    3. सहकारी समितियों के सदस्य किसान की सभी साख आवश्यकताओं की पूर्ति सहकारी साख संस्थाओं से की जा सके। जिससे वे अन्य वित्तीय संस्थाओं न जावें व एक छत के नीचे सभी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

    4. ऋण उपलब्ध कराने की सरल प्रक्रिया अपनाई जावें। जिससे त्वरित ऋण उपलब्ध करवाया जा सकें।

    पात्र-प्रयोजन:

    कृषि भूमि धारक को छोटे-छोटे कृषि यंत्र बनवाने, डेयरी उद्देश्य दुधारू पशु खरीद, पशु चिकित्सा, पशु बीमा, केटल शैड निर्माण, दुगध प्रस्करण यंत्र, पानी की खेली बनवाने-पम्प रिपेयर, पाईप लाईन, फव्वारा, लघु सिंचाई संबंधी निर्माण एवं मरम्मत, नालों की मरम्मत व सुधार, ट्रैक्टर कल्टीवेटर, सीड ड्रील खरीद व रिपेयर, थ्रेसर, कुट्टी मशीन व कृषि यंत्रों की मरम्मत, ऊंटगाड़ी, बैलगाड़ी की खरीद व मरम्मत, चारा उगाने, पशु पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन, बागवानी करने, नर्सरी विकास, कृषि भूमि की फेनसिंग, मण्डेर का निर्माण/मरम्मत, बिजली बिल भुगतान, बीज उत्पादन, मेंहदी उत्पादन, फलदार पौधे के विकास आदि उद्देश्य हेतु वित्त उपलब्ध करवाना।

    पात्रता:

    1. काश्तकार जिले का निवासी हो।

    2. काश्तकार की स्वयं की कृषि भूमि हो। यह कृषि भूमि उसके वास्तविक कब्जे में हो तथा काश्तकार स्वयं काश्त करता हो।

    3. भूमि पूर्णतया भारत रहित हो एवं भूमि पर अन्य संस्था का भार दर्ज नहीं हो।

    4. काश्तकार गत तीन वर्षों से ऋण चुकारे का दोषी नहीं होना चाहिये।

    5. काश्तकार का सहकारी समिति का सदस्य होना आवश्यक होगा। बैंक से सीधे ऋण लिये जाने की दशा में उसे बैंक का नोमिनल सदस्य बनना होगा।

    ऋण राशि एवं सीमा:

    1. कृषक आवेदन की कृषि भूमि की डी.एल.सी. दर/मूल्य के 70 प्रतिशत तक जिसमें काश्तकार के पक्ष में स्वीकृत फसली ऋण की साख सीमा राशि एवं मध्यकालीन ऋण की बकाया राशि यदि कोई हो कम करते हुए ऋण राशि स्वीकृत की जा सकेगी।

    2. ऋण की अधिकतम सीमा:

    1. केन्द्रीय सहकारी बैंक की शाखा स्तर से ऋण वितरण की स्थिति में अधिकतम सीमा असिंचित भूमि होने की दशा में रू. 50,000.00 व सिंचित भूमि होने की दशा मंे 20.00 लाख प्रति सदस्य होगी।

    2. समिति स्तर से ऋण वितरण की स्थिति में अधिकतम सीमा असिंचित भूमि होने की दशा में रूपये 50,000.00 व सिंचित भूमि होने की दशा में 1.00 लाख प्रति सदस्य होगी।

    सदस्य के पक्ष में ऋण की अधिकतम सीमा का निर्धारण उपलब्ध भूमि के आधार पर होगा।